00 दस फीसदी सीटें जीत कर रचा इतिहास
00देश भर से 59 महिलाएं पहुंची संसद
पंद्रहवीं लोकसभा महिलाओं के लिए शुभ रही है। स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार महिलाओं ने अपने राजनैतिक कौशल को दिखाते हुए दस फीसदी सीटें जीत कर इतिहास रच दिया है। महिला उम्मीदवारों ने 59 सीटों पर जीत दर्ज की है। देश के अब तक के संसदीय इतिहास में किसी भी लोकसभा चुनाव में महिला सांसदों की संख्या पचास तक भी नहीं पहुंच पाई थी।
2004 के लोक सभा चुनाव में 355 महिलाओं ने चुनाव लड़ा था जिनमें से मात्र 45 महिलाएं ही संसद की सीढ़ी चढ़ पाईं थी। उन्हें मात्र 8.3 फीसदी प्रतिनिधित्व मिल सका था।
1962 के बाद हुए लोकसभा चुनावों में से अब तक सबसे ज्यादा 49 महिलाए 1999 में चुन कर आई थीं। जिसमें इस बार दस महिला सांसद का इजाफा हुआ है। इस बार सबसे अधिक १३ महिला सांसद उत्तर प्रदेश से आईं हैं। पश्चिम बंगाल से सात, मध्यप्रदेश से छह आंध्रप्रदेश से पांच गुजरात पंजाब व बिहार से चार चार महिला सांसद जीत कर आईं हैं।
पिछले आंकड़ों पर नजर दौड़ाएं तो 1984 को छोड़कर 1996 से पहले हुए चुनावों में महिला सांसदों की गिनती 40 तक भी नहीं पहुची थी।1996 में 40 तो 1989 में 29 महिला सांसद चुनी गई थीं। सबसे कम महिलाएं 1977 में चुनी गईं थी उस वक्त लोकसभा पहुंचने वाली महिलाओं की संख्या मात्र 19 रह गई थी।
11 वीं लोकसभा से अटका महिला आरक्षण विधेयक
महिलाओं ने अपनी शक्ति का लोहा मनवाते हुए बिना आरक्षण के ही दस फीसदी सीटों पर कब्जा किया है जबकि महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण देने वाला महिला आरक्षण विधेयक आज भी पारित होने का इंतजार कर रहा है। यह पहली बार ग्यारहवीं लोकसभा में पेश किया गया था। तब से लेकर आज तक कई बार हंगामा तो हुआ है लेकिन महिला आरक्षण विधेयक पारित नहीं हो सका है। विधेयक का संसद में कई बार चीरहरण हो चुका है। जब पहली बार इसे 11 वीं लोक सभा में पेश किया गया था तो इसकी प्रतियां फाड़ी गई थीं।
वैसे तो भारतीय राजनीति में राष्ट्रीय स्तर पर और विभिन्न प्रदेशों में कई महिला नेताओं का दबदबा रहा है लेकिन एक कड़वी सच्चाई ये भी है कि मायावती, जयललिता या ममता बैनर्जी जैसी नेत्रियों को छोड़कर ज्यादातर का नाता किसी न किसी राजनीतिक परिवार से ही रहा है। वर्ष 2004 के चुनाव में 355 महिला उम्मीदवारों ने चुनाव लड़कर 45 ने विजय श्री हासिल की थी। 1999 में 284 महिला उम्मीदवारों में से मात्र 49 ही जीत सकीं थी। पंद्रहवीं लोकसभा के लिए हुए आम चुनाव में कुल 556 महिलाओं ने अपनी किस्मत आजमाई थी। इनमें सोनिया गांधी, दलित नेता चौधरी दलबीर सिंह की बेटी कुमारी शैलजा (अंबाला से), भटिंडा से सुखबीर सिंह बादल की पत्नी हरसिमरत कौर, चितौरगढ़ से गिरिजा व्यास, शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले, सुनील दत्त की बेटी प्रिया दत्त और, विदिशा से सुषमा स्वाराज और ममता बैनर्जी, मेनका गांधी आदि प्रमुख रहीं।
विभिन्न लोकसभा में महिला सांसदों की संख्या
वर्ष 2009-59
वर्ष 2004- 45
वर्ष 1999-49
वर्ष 1998-43
वर्ष 1996-40
वर्ष 1989-29
वर्ष 1977-19
वर्ष 1962-31
राजनैतिक दलवार महिला सासंदों की संख्या
वर्ष 2009 में महिला सांसद
कुल -महिला सासंद 59
कांग्रेस - 23
भाजपा - 13
तृणमूल कांग्रेस-4
समाज वादी पार्टी-4
बहुजन समाज पार्टी-4
जनता दलू यू-2
अकाली दल-2
राष्ट्रवादी कांग्रेस-2
तेलंगाना राष्ट्रसमिति-1
राष्ट्रीय लोकदल-1
शिवसेना-1
डीएमके-1
सीपीएम-1
मूंछ की कहां पूछ
-
देशपालसिंह पंवार
नाक के नीचे जो ऑंधी आई थी, उसमें सिर्फ बाल ही बॉंका हुआ था, किसी और के
हताहत होने की कोई सूचना नहीं आई। 0-एक वो जमाना था जब मूंछें आन-...
11 वर्ष पहले
