मौजूदा दौर में पेट्रोल हमारे जीवन का एक अहम हिस्सा बन गया हैं। शहर की तो छोड़े, गांव वाले भी इसके इतने आदि हो चुके है कि इसके बिना दो कदम चल नहीं सकते। लेकिन हम में से बहुत कम लोगों को पता होगा कि आम आदमी तक पेट्रोल पहुंचाने वालों को यह बेहद घातक साबित होता हैं। जब हम पेट्रोल पंप पर जाते है तो जो चेहरे हंसते-मुस्कुराते हमारा स्वागत कर पेट्रोल देते हैं उनके लिए पेट्रोल पंपों पर लगातार काम करना स्वास्थ्य की दृष्टि से बहुत खतरनाक होता हैं, वे अंदर से खोखला होते जाते हैं। २४ घंटे पेट्रोल की गंध उसके शरीर में बनी रहती है यह गंध हवा के द्वारा उनके सांसों के साथ फेफड़े में जाती है जो समूचे शरीर तंत्र को कमजोर बना देती हैं।
गंध से नशा होता और नशे से बीमारी
डॉक्टर भीम राव अम्बेडकर अस्पताल के अधीक्षक एमडी डॉ. जी.बी. गुप्ता का कहना हैं कि पेट्रोल के वाष्पीकरण के बाद उसमें से गंध आती है जो सीधे फेफड़े तक जाकर शरीर में एक अजीब सा नशा की स्थिति पैदा करती है। यहीं नशा आगे जाकर ब्रॉकाइट्स जैसे घातक बीमारियों का कारण बन सकती है
औद्योगिक विष अनुशंधान कें्र लखनऊ के एक शोध के निष्कर्ष भयावह हैं। इनमें बताया गया है कि पेट्रोल पंप पर नंगे हाथों काम करने वालों को कई त्वचा संबंधी बीमरियों का भी सामना करना पड़ सकता हैं। शोध कहते है कि पोट्रल पंप पर काम करने वालों और गैराज में पेट्रोल वाहनों की मरम्मत करने वालों के रक्त मूत्र में सीसे (लेड) की मात्रा पाई गई है जो लीवर व गुर्दे को खराब करती हैं। इससे व एनीमिया, हृदय रोग और बेहरेपन का भी शिकार हो सकते हैं।
बचाव ही बेहतर है
डॉ. गुप्ता के अनुसार बचाव ही इसके बेहतर उपाय होते हैं। इसके लिए पूरे शरीर को ढ़कने से ऐपे्रन से ढ़के एवं हाथों में ग्लोब का इस्तेमाल करें। हमारे यहां एप्रेन तो पहन लेते है जबकि ग्लोब का इस्तेमाल कोई नहीं करता। लगातार पेट्रोल के संपर्क में न रहे। नौकरी को बदल-बदल कर करते रहना चाहिए।
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