पानी जीवन का आधार है और ज्यादातर बीमारियों की जड़ दूषित पानी होता है। उसमें मौजूद तत्वों में बदलाव आम आदमी के स्वास्थ्य पर तुरंत असर डालते हैं। निर्धारित मात्रा के उपर नीचे होते ही स्वास्थ्य डगमगाने लगता है। इनमें मौजूद नाइट्रेट, लोहा, सल्फेट आर्सेनिक आदि तत्वों के बढ़ते ही स्वास्थ्य पर विपरीत असर डालते हैं। जल के तत्वों की मात्रा में खतरनाक बदलाव आ रहे हैं। लगातार दोहन और रासायनिक खादों के अधाधुंध प्रयोग साथ ही उद्योगों से होने वाले प्रदूषण से पानी में हानिकारक रसायनों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इसके साथ ही एक बड़ा भाग प्लास्टिक और सीमेंट से ढंकने के कारण वर्षा जल भूमि में नहीं जा पा रहा जिसे पानी के इन बदलावों को जिम्मेदार माना जा रहा है।
प्रकृति द्वारा मुफ्त में मिलने वाला पानी भी शुद्ध नहीं रहा। पानी में आर्सेनिक, फ्लोराईड, लोहा, नाईट्रेट आदि की मात्रा स्वास्थ्य को दुष्प्रावित करने वाली स्थिति में पहुंच गई है।
कें्रीय भूजल बोर्ड के शोंधों के आधार पर जारी रिर्पोट में प्रदेश के अनेक क्षेत्रों के पानी में मौजूद तत्वों में खतरनाक स्तर तक बढ़ोत्तरी हुई है। इन में त्वचा कैंसर के लिए जिम्मेदार आर्सेनिक, सल्फेट, दांत के रोंगो का कारण फलोराईड व नाइट्रेट आदि शामिल हैं।
शुद्ध पानी में सल्फेट का मानक स्तर चार मिलीग्राम प्रति लीटर है फ्लोराईड की अधिक मात्रा दातों सहित हड्डी संबंधी परोशानियों को जन्म देती है। इसका मानक स्तर १.५ पीपीएम है। शरीर के लिए बेहद घातक एवं त्वचा रोगों का कारण आर्सेनिक तो कई गुना बढ़ा हुआ है। इसका मानक स्तर ०.५ मिलीग्राम प्रति लीटर है।
लगातार गिर रहा भूजल स्तर
केन्द्रीय भूजल बोर्ड के एक अध्ययन के अनुसार भूजल स्तर तेजी से गिर रहा है। यह भूजल स्तर ४ से ७ मीटर तक नीचे जा चुका है, बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, कम वर्षा और जमीन पर हो रहे निर्माण कार्यों खासकर जमीन को सीमेंट से घेरने कारण यह समस्या तेजी से बढ़ रही है, इसकी वजह से भूजल का पुनर्चक्रीकरण और पुनर्भरण नहीं हो पाता है।इसके अनुसार ७३ प्रतिशत से अधिक कुओं का जलस्तर कई मीटर तक गिर चुका है
मूंछ की कहां पूछ
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देशपालसिंह पंवार
नाक के नीचे जो ऑंधी आई थी, उसमें सिर्फ बाल ही बॉंका हुआ था, किसी और के
हताहत होने की कोई सूचना नहीं आई। 0-एक वो जमाना था जब मूंछें आन-...
11 वर्ष पहले

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