मेक्सिको से शुरू हुआ स्वाइन फ्लू नामक जानलेवा रोग से अमरीका सहित करीब डेढ दर्जन देशों की सरकारों को चिंता में डाल दिया है। एलोपैथी में इस रोग पर काबू पाने कोई कारगर दवा नहीं है। वैसे तो गरम प्रदेश होने के कारण स्वाईन फ्लू के फैलने की संभावना लगभग न के बराबर है। लेकिन फिर प्रदेश से बाहर विशेषकर ठंडे प्रदेशों की ओर जाने वाले और हवाई यात्रा करने वालों में इसके संक्रमण का खतरा है और यदि स्वाईन फ्लू के रोगाणु किसी के साथ आ गए तो फैलने में देरी नहीं लगेगी। लेकिन चिंता करने की आवश्यकता नहीं क्योंकि हमारे आयुर्वेद में स्वाईन फ्लू से लडऩे की ताकत है आमतौर पर गरम मसाला में उपयोग किया जाने वाला वदान्या फूल इस रोग पर असरकारक है। यह फूल मुख्यत: उत्तर पूर्व चीन का पौधा है। इसका अंगे्रजी नाम स्टार एनाइस है तथा इसका वनस्पतिक नाम इलीसियम बेरम है।
एच१ एन१ वीषाणु द्वारा फैलाया गया रोग स्वाइन फ्लू छूत का रोग है। अब तक स्वाईन फ्लू में कारगर एक मात्र दवा टामी फ्लू नामक दवा एच१ एन१ वायरस पर काबू पाने में कारगर है और यह दवा वदान्या फूल यानी स्टार एनाइस से बनती है। भारत में वदान्या फूल गरम मसाले में उपयोग होता है। यह भारत, अमेरिका और चीन में मिलता है। इस फूल का आकार सितारे जैसा होता है इसलिए इसे स्टार एनाइस कहते हैं। गरम मसालों में उपयोग होने की वजह से चीन के स्वास्थ्य मंत्री ने देश की जनता को सलाह दी है कि वे भोजन में स्टार एनाइस का इस्तेमाल करें।
आयुर्वेदाचार्यों के अनुसार स्वाइन फ्लू से बचने के लिए लिए रोजाना मुलहठी, सौंफ, आइजवान, मुनक्का, अंजीर, उन्नाव, अरुष के पत्ते, जूफा, खूबकला, हंसराज, गुलबनस्पा तथा काली मिर्च सभी को बराबर मात्रा में लेकर भूसे की तरह कूचकर इसकी बीस ग्राम मात्रा को ढाई सौ मिली पानी में पकाकर व छानकर पांच ग्राम शक्कर मिलाकर सुबह शाम लेने से इस बीमारी से बचाव संभव है। चूंकि यह बीमारी सुअर के जीन में पाया जाता है, इसलिए सुअर का मांस खाने से पहले उसे अच्छी तरह से पकाना आवश्यक है।
आयुर्वेद में है स्वास्थ वृत्त
आयुर्वेद के प्रोफेसर संजय शुक्ला बताते हैं कि आयुर्वेद में स्वास्थ वृत्त है जिसके अनुसार बाहर से आने पर वहां का अन्न सहित कपड़े आदि को वहीं छोड़ आना चाहिए यदि ऐसा होता है तो संक्रमण वाले रोंगो की संभावना स्वत: ही समाप्त हो जाती है। इसके अलावा वादान्या फूल में प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और संक्रमण से बचाव करने की क्षमता है जिससे वादन्या फूल को खाकर स्वाइन फ्लू के संक्रमण से बचा जा सकता है।
मूंछ की कहां पूछ
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देशपालसिंह पंवार
नाक के नीचे जो ऑंधी आई थी, उसमें सिर्फ बाल ही बॉंका हुआ था, किसी और के
हताहत होने की कोई सूचना नहीं आई। 0-एक वो जमाना था जब मूंछें आन-...
11 वर्ष पहले

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