जब जब परिस्थतियां मानव समाज के सामने जटिलताएं पैदा करती हैं तब तब वह अध्यात्म के सहारे रास्ता ढूंढता रहा है। ऐसा ही कुछ मौजूदा मंदी के दौर में देखने को मिल रहा है। मंदी के प्रभाव से उपजने वाले तनाव को दूर करने के लिए आम व खास सभी भक्ति, भगवान, मंदिर-मस्जिद गुरुद्वारा, अध्यात्म की ओर मुड़ रहे हैं। ज्योतिष को अवैज्ञानिक मानने वाले सूचना तकनीक के पैरोकार व उद्योगपति भी अब उसके सहारे अपने बेहतर समय को खोज रहे हैं। गृह-नक्षत्रों को अपने पक्ष में करने के उपाय किए जा रहे हैं। ज्योतिषों व पंडितों की पूंछ परख लगातार बढ़ रही है।
विश्वव्यापी मंदी ने कृषि प्रधान होने के बावजूद कुछ हद तक ही सही देश-प्रदेश को अपनी चपेट में लिया है विशेषकर शहरी वर्ग और उद्योगों से जुड़े लोगों को मंदी की सुरसा प्रभावित कर रही है। लगभग सभी प्रत्यक्ष-प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हो रहे हैं। यहां तक की व्यवसायिक पाठ्यक्रमों प्रबंधन, सूचना तकनीक, इंजीनियरिंग, पत्रकारिता आदि में अध्यनरत युवा भी गहरे तनाव में हैं। इस तनाव को दूर करने के लिए वे सब मंदिर-मस्जिद गुरुद्वारों का सहारा ले रहे हैं। इन दिनों कर्म पर भरोसा करने वाले युवा भी कर्म के साथ मन को शांत रखने के लिए भक्ति का सहारा ले रहे हैं। यदि हम कुछ वर्षों पूर्व में जाएं तो युवाओं के साथ ही आम आदमी कर्मवादी हो चला था, उसे अपनी शिक्षा और योग्यता पर पूरा भरोसा था, वह मंदिर-मस्जिदों या भक्ति से थोड़ा सा दूर होता नजर आ रहा था। अभिभावक भी बच्चों के व्यवहार से ज्यादा चिंतित नहीं थे क्योंकि चारो तरफ शिक्षित होने वालों को मोटे वेतन की नौकरियां मिल रहीं थी। अध्यात्म का योगदान नजर नहीं आ रहा था। लेकिन जब से मंदी ने देश में कुछ हद तक और विदेश में बड़े पैमाने पर असर दिखाया तो सभी को परमपिता की याद आई और विभिन्न रूपों में उन्हें याद किया जाने लगा है। पूजा आराधना स्थलों पर जाने वालों की संख्या में एकाएक वृद्धि हो रही है। लोग पंडित-मौलवियों से शांति की राह पूछ रहे हैं। मंदिरों में दोनो वक्त दर्शनार्थी पहुंच रहे हैं तो पांच वक्त अजान करने वालों की संख्या भी बढ़ी है। बाबा रामदेव के योग शिविरों, पं.श्री रविशंकर के निर्देशन में चलने वाले आर्ट आफ लिविंग की कक्षाओं में पहुंचने वाले अब पहले से ज्यादा हो गए हैं।
बढ़ा है ज्योतिष पर भरोसा
मंदी ने बड़े-बड़ों को पानी पिलवा दिया है। देश भर में ज्योतिषीय परामर्श देने वाले मुकेश जैन बताते हैं कि मंदी के बाद से उनके पास परामर्श लेने वालों की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है। ज्यादातर उद्योगपति व युवा, महिलाएं आदि उनके पास जाकर परामर्श ले रहे हैं एवं बताए गए उपायों को पूरी श्रद्धा के साथ अपना रहे हैं। श्री जैन के अनुसार लोगों में ज्योतिष के प्रति विस्वास और मजबूत हुआ है।
बढ़ी नक्षत्रों के नगों की वृद्धि
मालवीय सड़क पर स्थित सुमित ज्वेलर्स के संचालक अशोक काकडिय़ा बताते हैं कि मंदी के बाद खरीददारों की संख्या तो घटी लेकिन नक्षत्रों संबंधी नगों हीरा, मोती, गोमेद, पुखराज, माणिक्य आदि खरीदने वालों की संख्या बढ़ी है।
अध्यात्म ही दिलाएगा शांति
पं.मोहन मुरारी के अनुसार मंदी से उपजे तनाव से शांति केवल अध्यात्म ही दिला सकता है क्योकि यही वह मार्ग है जो थोड़े में संतोष करने की सीख देता है और कर्म करने के बाद कर्मफल परमपिता पर छोडऩे के लिए कहता है। उनके अनुसार लोग पूजा आराधना संबंधी परामर्श बड़ी संख्या में आ रहे हैं। विशेषकर शहरी वर्ग में मंदी ने एक बार फिर भक्ति की अलख को मजबूत कर दिया है।
मूंछ की कहां पूछ
-
देशपालसिंह पंवार
नाक के नीचे जो ऑंधी आई थी, उसमें सिर्फ बाल ही बॉंका हुआ था, किसी और के
हताहत होने की कोई सूचना नहीं आई। 0-एक वो जमाना था जब मूंछें आन-...
11 वर्ष पहले

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें